अभिषेक सेमर,दुर्ग। छह वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या करने के मामले में दुर्ग न्यायालय ने उसके 24 वर्षीय चाचा को फांसी की सजा सुनाई है। मोहन नगर थाना क्षेत्र के इस बहुचर्चित मामले में करीब 18 महीने तक चले फास्ट ट्रैक कोर्ट के ट्रायल के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए कठोरतम दंड दिया है। फैसले के बाद मामले में न्याय की मांग कर रहे परिजनों और विभिन्न संगठनों में संतोष देखा गया।
नौ कन्या भोजन के लिए निकली थी मासूम
मामला 7 अप्रैल 2025, रामनवमी के दिन का है। छह वर्षीय बच्ची घर से नौ कन्या भोजन के लिए निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी।
परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।
बाद में बच्ची का शव एक कार से बरामद किया गया। शव की हालत देखकर पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। गर्मी के कारण शव पर फफोले तक पड़ चुके थे।

DNA जांच ने खोला राज
घटना की गंभीरता को देखते हुए मोहन नगर पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस ने मामले में बच्ची के 24 वर्षीय चाचा को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान मृतका के शरीर से लिए गए सैंपल और आरोपी के DNA सैंपल की जांच की गई, जिसमें समानता मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य जुटाए।
आक्रोशित लोगों ने कार मालिक के घर में लगाई आग
मासूम की हत्या की खबर फैलते ही इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था। आक्रोशित मोहल्लेवासियों ने कार मालिक के घर को आग के हवाले कर दिया था। वहीं विभिन्न संगठनों और परिजनों ने आरोपी को कठोर सजा दिलाने की मांग को लेकर मोहन नगर थाने का घेराव किया था।
बेटी का शव लेकर थाने के सामने बैठी थी मां
प्रदर्शन के दौरान मृत बच्ची की मां अपनी बेटी का शव लेकर थाने के सामने धरने पर बैठ गई थी। परिजनों और प्रदर्शनकारियों ने आरोपी को जल्द से जल्द सजा दिलाने की मांग की थी। पुलिस के आश्वासन के बाद बच्ची का अंतिम संस्कार किया गया।

कोर्ट ने सुनाई तीन धाराओं में सजा
दुर्ग पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद मामला सुनवाई के लिए अपर सत्र न्यायाधीश अनिष दुबे के न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय ने दोष प्रमाणित होने पर आरोपी को POCSO एक्ट, 2012 की धारा 6(1) के तहत मृत्युदंड और 5 हजार रुपए अर्थदंड, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड और 5 हजार रुपए अर्थदंड, तथा धारा 238(क) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 1 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।शासन की ओर से मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार ने की।
न्यायालय के फैसले से खत्म हुआ लंबा इंतजार
मासूम के साथ हुई दरिंदगी के बाद परिजन लंबे समय से न्याय की आस लगाए हुए थे। फास्ट ट्रैक कोर्ट में चले ट्रायल के बाद आए इस फैसले ने मामले को एक निर्णायक मोड़ दिया है। न्यायालय ने दोषी को अपराध की गंभीरता के अनुरूप कठोरतम सजा सुनाई है।


